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Saturday, November 16, 2019

अमिताभ बच्चन ने जताई मूवी थिएटर्स के भविष्य पर चिंता, बोले- हमें इन्हें बचाने के रास्ते तलाशने होंगे

बॉलीवुड डेस्क. अमिताभ बच्चन का कहना है कि फिल्में सबसे पहले बड़े पर्दे पर रिलीज होना चाहिए। उसके बाद उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बाकी डिवाइस पर लाना चाहिए। वे 25वें कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (केआईएफएफ) की क्लोजिंग सेरेमनी में दिखाई गई रिकॉर्डेड स्पीच में डिजिटल एंटरटेनमेंट के दौर में मूवी थिएटर्स के भविष्य पर बात कर रहे थे। दरअसल, खराब सेहत के चलते बिग बी इस फेस्टिवल में शामिल नहीं हो सकते थे। इसलिए उन्होंने अपनी स्पीच रिकॉर्ड कर भेजी थी।

  1. बिग बी ने स्पीच में कहा, "आज जहां पुरुष और महिला इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, वहीं कंटेस्टेंट को अपने घर पर सुविधाजनक तरीके से देखने के कई विकल्प मौजूद हैं। फिर भी बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का रोमांच बेमिसाल रहता है। हमें इस परम्परा की सुरक्षा के रास्ते तलाशने की आवश्यकता है। फिल्में पहले सिनेमा हॉल्स में दिखाई जाएं और फिर स्ट्रीमिंग और दूसरी डिवाइस पर। मुझे यह विचार पसंद है और इसके प्रति ईमानदार भी हूं।"

  2. तेजी से बढ़ते डिजिटल स्पेस के बीच सिनेमा की भूमिका को लेकर बिग बी ने कहा, "चूंकि दर्शक तेजी से ताजा डिजिटल कंटेंट या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की ओर बढ़ रहे हैं। इसलिए उनका ध्यान इस फैक्ट की ओर अग्रसर करना बहुत जरूरी है कि फिल्में प्राथमिक तौर पर मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं, बड़ी संख्या में दर्शकों को बिग स्क्रीन तक खींचती हैं।"

  3. अमिताभ आगे सवाल उठाया, "क्या हॉल्स में सिनेमा का आकर्षण सिर्फ याद बनकर रह जाएगा? क्या स्टूडियो एक-दूसरे के साथ खिलवाड़ करेंगे? क्या छोटी फिल्में सरवाइव करने के लिए संघर्ष करेंगी और बड़े ब्रांड की धाक बॉक्स ऑफिस पर बरकरार रहेगी?"

  4. बिग बी कहते हैं, "नेटफ्लिक्स और अमेजन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म फिल्में दिखाने की क्रांति ला रहे हैं। जबकि कई दूसरी स्ट्रीमिंग सर्विस भी भारत में मौजूद हैं। ऐसे में आगे क्या होगा? क्या 'गॉन विद दि वाइंड' और 'मुगल-ए- आजम' जैसी क्लासिक फिल्में छोटे पर्दे पर उसी रोमांच के साथ देखी जा सकेंगी, जिसने उन्हें ब्लॉकबस्टर बनाया? क्या सत्यजीत रे की ट्रायलॉजी या उनकी क्लासिक 'जलसाघर' छोटे से लैपटॉप, या मोबाइल फोन पर वही संवेदनशीलता पकड़ सकती है। डेविड लीन की 'लॉरेन्स ऑफ़ अरबिया' का क्या? क्या इसका शानदार पैनोरमा डिजिटल स्पेस पर सीमित हो सकता है?"

  5. हालांकि, बिग बी ने कुछ ऐसे बिन्दुओं को सुनिश्चित करने का इशारा भी किया, जिनसे कि लोग मूवी थिएटर्स तक जाना जारी रखें। इनमें उन्होंने उचित टिकट दर और बेहतर कंटेंट पर जो दिया। वे कहते हैं, "बड़े पर्दे पर फिल्म देखना मोहक और पैसा वसूल होना चाहिए। कंटेंट ऐसा होना चाहिए कि लोग आलस छोड़कर सिनेमा हॉल्स की ओर चले आएं। "

  6. वे कहते हैं कि फिल्म बनाने वालों को आधुनिक युवा की सोच का जानकार भी होना चाहिए। बकौल बिग बी, "युवा दर्शक इंटरनेशनल सिनेमा, टीवी और आर्ट्स के संपर्क में हैं। वे अपनी विकसित संवेदनाओं को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाला मनोरंजन चाहते हैं।



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      Amitabh Bachchan Talks About The Future Of Movie Theatres In The Age Of Digital Entertainment


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