यूटिलिटी डेस्क.बचपन में हम सबने खरगोश और कछुए की कहानी सुनी है। इससे हम सीखते हैं कि धीमा लेकिन निरंतरशील रहने से जीत मिलती है। अपने काम में इस सिद्धांत को अपनाने की सीख दी जाती है। लेकिन क्या यह जीवन के सबसे अहम लक्ष्यों में से एक यानी रिटायरमेंट के मामले में लागू होता है? उन्नत मेडिकल सुविधाओं की मदद से लगातार बढ़ती जीवन प्रत्याशा दर के कारण रिटायरमेंट लाइफ 15-20 साल या इससे ज्यादा लंबी हो सकती है।
इसलिए यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है कि रिटायरमेंट के बाद के लिए हमारे हमारी तैयारी अच्छी हो। सबसे जरूरी है कि यह महंगाई दर को मात दे सके। ऐसी स्थिति में हमें कछुआ नहीं बल्कि तेज दौड़ने वाला खरगोश बनने की जरूरत है। इससे आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ज्यादा जोखिम लेते हुए इक्विटी में निवेश कर पाएंगे। इसके उलट आप अगर फिक्स डिपॉजिट जैसे तरीके अपनाकर कछुए की रणनीति पर चलेंगे तो लक्ष्य से दूर तो रहेंगे ही साथ ही बुढ़ापे में गरीबी भी झेलनी पड़ सकती है।
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