खेल डेस्क. देश की नंबर-1 महिला टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना ने कहा कि देश में इंटरनेशनल लेवल के टूर्नामेंट कम होते हैं। इस कारण अनुभव हासिल करने में हमें यूरोपियन खिलाड़ियों की तुलना में 4 से 6 साल का अधिक समय लगता है। इससे हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन ग्रैंड स्लैम में अपेक्षाकृत अच्छा नहीं रहता है। इसके बाद जॉब सिक्योरिटी और फाइनेंशियल दिक्कत के कारण कई खिलाड़ी खेल छोड़ देते हैं।
भोपाल में सोमवार से शुरू हुए आईटीएफ महिला चैंपियनशिप में हिस्सा लेने आईं अंकिता ने कहा कि यूरोपियन देशों में इंटरनेशनल स्तर के अधिक टूर्नामेंट होते हैं। उनकी फिटनेस हमारे मुकाबले में अच्छी होती है। इस कारण वहां के खिलाड़ी को 16 से 20 साल की उम्र में अधिक अनुभव मिल जाता है। दूसरी ओर कम टूर्नामेंट के कारण हमें उनकी बराबरी करने में 22 से 24 साल तक खेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह खेल काफी खर्चीला है। ऐसे में स्पॉन्सरशिप नहीं मिलने पर खिलाड़ियों का खेल से जुड़े रहना मुश्किल होता है। जब तब आपके अच्छे रिजल्ट नहीं आते स्पॉन्सर मिलना मुश्किल होता है। 2018 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली खिलाड़ी ने कहा कि मैंने चार साल की उम्र से टेनिस सीखना शुरू कर दिया था। मेरे बड़े भाई टेनिस खेलते थे।
भारत-पाक के मैच का फैसला इंटरनेशनल फेडरेशन को करने दें
भारत और पाकिस्तान के बीच 29 और 30 नवंबर को डेविस कप का मैच होना है। भारत ने सुरक्षा का हवाला देते हुए पाक में खेलने से मना कर दिया था। अंकिता ने कहा कि इंटरनेशनल फेडरेशन को ही यह निर्णय लेना है और हमें उस पर ही छोड़ देना चाहिए। लीग पर उन्होंने कहा कि इस तरह के इवेंट से सभी खेल को फायदा मिलता है। हालांकि इसमें खिलाड़ियों को अधिकतम 2.25 लाख रुपए मिलेंगे। खिलाड़ियों को लीग में कम पैसे के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि आप अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो खेल में पैसा आने लगता है।
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