एजेंसी. भारतीय मिलेनियल्स के बीच कर्ज लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। यही नहीं वे अब असुरक्षित कर्ज (अनसिक्योर्ड लोन) लेने में भी पीछे नहीं है। इसके चलते बैंको और एनबीएफसी का एनपीए बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन-सिबिल ने अपनी एक रिपोर्ट में यह आशंका जाहिर की है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1980 के बाद जन्मे लोगों (मिलेनियल्स) में कर्ज लेने की मांग 58% बढ़ी है। उनके डिफॉल्ट करने की भी आशंका भी जताई जा रही है। नॉन मिलेनियल्स की कर्ज मांग में सिर्फ 14% इजाफा हुआ। मिलेनियल्स क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन के रूप में 72% तक कर्ज ले रहे हैं। इसके चलते अब रिटेल कर्ज की मांग में भी इजाफा हुआ है।
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कॉर्पोरेट सेगमेंट में एनपीए की समस्या से जूझ रहे कर्जदाता भी अब रिटेल सेक्टर की तरफ बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल में कर्ज बढ़ना ठीक तो है लेकिन इससे राष्ट्रीय बचत पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही सिबिल स्कोर भी प्रभावित हो सकता है। यदि मिलेनियल्स के वित्तीय व्यवहार को देखें तो यह देश में खर्च करने की प्रवृत्ति को बताता है, लेकिन यह खर्च असुरक्षित कर्ज लेकर किया जा रहा है जिससे लोन डिफॉल्ट का भी संकट हो सकता है।
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सिबिल ने रिपोर्ट की पुष्टि के लिए बताया कि टू-व्हीलर और ऑटो जैसे सुरक्षित सेगमेंट में सिर्फ 9% ही कर्ज है। क्रेडिट स्कोर को आम बोलचाल की भाषा में सिबिल स्कोर भी कहा जाता है। सिबिल स्कोर ही किसी आम आदमी की वित्तीय सेहत को बताता है। भारत में इसे क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (सिबिल) ने सबसे पहले इसे जारी करना शुरू किया था। अब देश में चार कंपनियां हैं जो कि क्रेडिट स्कोर मुहैया कराती हैं। ये कंपनियां हैं क्रिफ हाई मार्क क्रेडिट सर्विस, इक्वीफैक्स क्रेडिट सर्विस, एक्सपेरियन क्रेडिट सर्विस और ट्रांस यूनियन सिबिल लिमिटेड।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि मिलेनियल्स क्रेडिट स्कोर के बारे में अधिक जागरूक हैं। वे समय-समय पर अपना स्कोर चेक करते हैं। इसका सबूत है उनका सिबिल स्कोर 900 में से औसत 740 होना है। गुजरात में मिलेनियल्स का सबसे ज्यादा 747 का सिबिल स्कोर है। इसके बाद हरियाणा के मिलेनियल्स का 743 और फिर राजस्थान के मिलेनियल्स का 742 है। ब्यूरो ने यह भी कहा कि मिलेनियल्स में उनके व्यवहार को सुधारने की भी प्रवृत्ति होती है। 700 से कम के स्कोर वाले मिलेनियल्स में से 51% ने महज छह महीने के भीतर अपने स्कोर में 65 अंकों का सुधार किया है।
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