नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने रतन टाटा के खिलाफ नुस्ली वाडिया की आपराधिक मानहानि का केस सोमवार को बंद कर दिया। वाडिया ने खुद ही याचिका वापस ले ली। टाटा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वाडिया की मानहानि की मंशा नहीं थी। हालांकि, वाडिया जवाब से संतुष्ट नहीं थे लेकिन केस वापस लेने को राजी हो गए। कोर्ट ने पिछले हफ्ते कहा था कि आप दोनों समझदार हैं, उद्योग जगत के प्रमुख हैं। बातचीत से मामला सुलझा सकते हैं, मुकदमेबाजी का क्या जरूरत है?
वाडिया ग्रुप के चेयरमैन नुस्ली वाडिया का केस पिछले साल बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। उसके बाद वाडिया ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उनका कहना था कि 24 अक्टूबर 2016 को सायरस मिस्त्री को टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाने के बाद रतन टाटा और टाटा ग्रुप के बाकी लोगों ने मेरे लिए अपमानजनक शब्द कहे थे। मुझ पर पर मिस्त्री से मिले होने के आरोप लगाए गए थे। मैं रतन टाटा और अन्य लोगों के जवाब से संतुष्ट नहीं था। इसलिए केस कर किया।
वाडिया 2016 में टाटा ग्रुप की इंडियन होटल्स, टीसीएस, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील समेत अन्य कंपनियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर शामिल थे। दिसंबर 2016 से फरवरी 2017 के बीच हुई बैठकों में शेयरधारकों ने वाडिया के खिलाफ वोटिंग कर उन्हें बाहर कर दिया था।
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