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Sunday, December 8, 2019

रघुराम राजन ने कहा- देश मंदी की चपेट में, बुरी खबर को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि देश की विकास दर मंदी की चपेट में है। एक मैगजीन में उन्होंने लिखा- भारतीय अर्थव्यवस्था में गहरी अस्वस्थता के संकेत हैं। देश में सत्ता का बहुत ज्यादा केंद्रीकरण हो गया है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पास ही सारी शक्तियां हैं और उनके मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं हैं।

राजन ने कहा, “यह समझने के लिए कि क्या गलत हुआ है, हमें सबसे पहले मौजूदा सरकार में केंद्रीकृत व्यवस्था के साथ शुरुआत करने की जरूरत है। न केवल बड़े फैसले पीएमओ में लिए जाते हैं, बल्कि विचारों और योजनाओं को भी प्रधानमंत्री के आसपास मौजूद लोगों का एक छोटा समूह तय करता है।” उन्होंने कहा- यह तरीका पार्टी के राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे के ठीक है, क्योंकि तमाम लोग उस मामले के जानकार हैं। आर्थिक सुधारों के मामले में यह तरीका कारगर नहीं है, क्योंकि शीर्ष पर बैठे लोगों के पास इस विषय की व्यवस्थित जानकारी नहीं होती, साथ ही उन्हें इस बात की समझ होती है कि राज्यों के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है।

बुरी खबर को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे: राजन

राजन ने कहा कि आर्थिक मंदी की समस्या से उबरने के लिए मोदी सरकार को पहले समस्या को स्वीकार करना होगा। उन्होंने कहा- शुरुआती बिंदु को समस्या की गंभीरता को पहचानना है। हर आंतरिक या बाहरी आलोचना को राजनीतिक ब्रांड के तौर पर पेश करने से हल नहीं निकलेगा। समस्या को अस्थायी मानने की आदत बदलनी होगी। सरकार को समझना होगा कि बुरी खबर या किसी असुविधाजनक सर्वे को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा, “भारत ग्रामीण इलाकों में संकट गहराने के साथ, मंदी की चपेट में है।”

जब तक पीएमओ ध्यान दे, तभी तक काम होगा

राजन ने कहा कि पिछली सरकारों ने कमजोर गठबंधन के बावजूद लगातार आर्थिक उदारीकरण का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा, “सक्षम मंत्रियों की गैरमौजूदगी, स्पष्ट दृष्टिकोण की कमी और व्यवस्था का अति केंद्रीकरण होने पर, किसी भी मुद्दे पर केवल तभी काम होता है, जब पीएमओ उस पर ध्यान देता है। जब पीएमओ का फोकस किसी दूसरी जगह चला जाता है, तो सारी प्रक्रिया थम-सी जाती है।”

मिनिममगवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस को गलत समझा गया

राजन ने कहा, “मोदी सरकार 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' का नारा देकर सत्ता में आई। इस नारे को अक्सर गलत समझा जाता है। इसका मतलब था कि सरकार ज्यादा क्षमता से काम करेगी, न कि लोगों और निजी क्षेत्र के जिम्मे ज्यादा काम छोड़ दिया जाएगा। सरकार ने ऑटोमेशन के लिए जो पहल की है, उससे लोगों को सब्सिडी या सरकारी योजनाओं का फायदा सीधे अकाउंट में मिलने लगा है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इस तरह के कई क्षेत्रों में सरकार की भूमिका कम होने की बजाय बढ़ी है।

विकास के लिए आर्थिक सुधारों पर जोर दिया

मंदी से जूझती भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार और विकास के लिए सुझाव देते हुए राजन ने पूंजी, भूमि और श्रम सुधार करने, बाजारों के उदारीकरण के जरिए निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और घरेलू दक्षता में सुधार के लिए भारत से सोच-विचार के साथ मुक्त व्यापार समझौतों में शामिल होने का आग्रह किया।



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रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन। (फाइल फोटो)


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