मुंबई. सायरस मिस्त्री टाटा सन्स के चेयरमैन और टाटा ग्रुप की 3 अन्य कंपनियों के बोर्ड में शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्त्री अपने नॉमिनी डायरेक्टर (नामित निदेशक) नियुक्त कर सकते हैं। ताकि कॉर्पोरेट गवर्नेंस बेहतर हो सके। मिस्त्री अक्टूबर 2016 में टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाए गए थे। बाद में ग्रुप की तीन कंपनियों के बोर्ड से भी इस्तीफा देना पड़ा था। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने 18 दिसंबर को मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उनकी फिर से बहाली के आदेश दिए थे।
ट्रिब्यूनल के फैसले को टाटा सन्स सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है
एनसीएलएटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए टाटा सन्स को 4 हफ्ते का वक्त मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट भी मिस्त्री के पक्ष में फैसला देती है तो भी मिस्त्री के चेयरमैन बनने के आसार नहीं हैं, क्योंकि वे खुद इच्छुक नहीं हैं। चेयरमैन पद पर उनके कार्यकाल के 5 महीने ही बचे हैं।
मिस्त्री 2006 में टाटा सन्स के बोर्ड में शामिल हुए थे। 2012 में रतन टाटा के रिटायरमेंट के बाद चेयरमैन बने थे। अक्टूबर 2016 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर चेयरमैन पद से हटा दिए गए। मिस्त्री ग्रुप ने टाटा सन्स के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी, लेकिन पिछले साल केस हार गए। इसके बाद मिस्त्री ने अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की थी।
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