नई दिल्ली.भारत और बांग्लादेश के बीच 22 नवंबर से कोलकाता में डे-नाइट टेस्ट खेला जाना है। यह दोनों देशों का पहला डे-नाइट टेस्ट है। आम तौर पर टेस्ट मैच लाल गेंद से खेला जाता है। लेकिन डे-नाइट टेस्ट में लाल गेंद को देखने में काफी मुश्किल होती है। इस कारण यहां गुलाबी गेंद का प्रयोग किया जाएगा। गुलाबी गेंद में लाल की तुलना में ऊपरी परत पर अधिक पेंट का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि गेंद जल्दी गंदी ना हो। इस गेंद में अधिक चमक होती है। चमक अधिक होने का मतलब तेज गेंदबाजों को स्विंग अधिक मिलेगी। मैच दोपहर एक बजे से शुरू होगा। यानी मैच के अंतिम दो सेशन में फ्लड लाइट का उपयोग किया जाएगा।
टेस्ट में एक बाॅल से 80 ओवर का खेल होता है। लाल गेंद को फ्लड लाइट में देखने में दिक्कत होती है जबकि वनडे में उपयोग होने वाली सफेद बॉल जल्द खराब हो जाती है। इस कारण 9 साल की रिसर्च के बाद डे-नाइट टेस्ट में गुलाबी गेंद को सबसे उपयुक्त पाया गया। अब तक कुल 8 देशों के बीच 11 डे-नाइट टेस्ट खेले गए हैं और सभी के रिजल्ट आए हैं। सबसे ज्यादा पांच मैच ऑस्ट्रेलिया में जबकि दो मैच संयुक्त अरब अमीरात में हुए हैं। इसके अलावा इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज में एक-एक मैच खेले गए हैं। भारत में पहली बार डे-नाइट टेस्ट खेला जाएगा।
एसजी की लाल और गुलाबी गेंद में ये चार बड़े अंतर
लाल गेंद
- लेदर पर सिर्फ डाई किया जाता है। इससे लाल रंग आ जाता है।
- गेंद पर सफेद धागे से सिलाई की जाती है।
- पेंट की अलग परत नहीं। इस कारण गेंद जल्द गंदी हो जाती है।
- बनाने में चार दिन लगते हैं।
गुलाबी गेंद
- लेदर पर डाई करने से गुलाबी रंग नहीं आता। इस पर पेंट किया जाता है
- गेंद पर काले धागे से सिलाई की जाती है
- गुलाबी रंग के पेंट की अलग परत लगाई जाती है
- बनाने में 8 दिन लगते हैं। लाल से चार दिन ज्यादा
9 साल की रिसर्च के बाद गुलाबी रंग पर सहमति
गुलाबी गेंद को इंटरनेशनल क्रिकेट में लाने से पहले 9 साल तक रिसर्च किया गया। 2006 में गुलाबी कुकाबुरा गेंद से एक चैरिटी मैच खेला गया। इसके बाद क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने बॉल बनाने वाले कंपनियों से डे-नाइट मैच के लिए बॉल बनाने को कहा।
वनडे और टी-20 कुकाबरा से, टेस्ट में 3 तरह की गेंद का इस्तेमाल
इंटरनेशनल क्रिकेट में तीन कंपनियों की गेंद का इस्तेमाल किया जाता है। टेस्ट में कुकाबुरा, ड्यूक और एसजी गेंद का इस्तेमाल होता है। भारत में एसजी जबकि वेस्टइंडीज-इंग्लैंड में ड्यूक का इस्तेमाल होता है। अन्य देश कुकाबुरा का इस्तेमाल करते हैं। वनडे और टी20 में सिर्फ कुकाबुरा गेंद का इस्तेमाल होता है।
कुकाबुरा बॉल
बीच वाले दोनों सीम हाथ से सिले जाते हैं और इसकी सिलाई एक-दूसरे के हिस्से तक जाती है। बाहरी चार सीम की सिलाई मशीन से की जाती है और ये अपने-अपने हिस्से तक सीमित होती हैं। गेंद की सीम जल्द घिस जाती है। इसलिए स्पिनरों के लिए मददगार नहीं होती।
ड्यूक बॉल
सभी छह सीम की सिलाई हाथ से होती है। सीम ज्यादा उभरी होती है। पेंट की अतिरिक्त कोटिंग होती है। इसलिए चमक ज्यादा समय तक रहती है। उभरी सीम स्विंग गेंदबाजों के लिए मददगार।
एसजी बॉल
सभी छह सीम की सिलाई हाथ से होती है। जो गेंद के एक हिस्से से दूसरे तक जाती है। इसलिए सीम ज्यादा उभरी होती है। सीम लंबे समय तक रहती है। इसलिए स्पिनरों को मदद। चमक जल्द खो देती है। रिवर्स स्विंग में मददगार होती है।
एक्सपर्ट ने कहा- पिच पर6 से 8 मिमी की घास रखना अहम
पहली बार एसजी बॉल से होने जा रहे टेस्ट से क्यूरेटर की भी परीक्षा होगी। गुलाबी गेंद का रंग खराब ना हो इसके लिए पिच पर 6 से 8 मिमी की घास रखना जरूरी है। क्योंकि यदि पिच पर घास नहीं होगी तो गेंद का कलर जल्द चला जाएगा और खिलाड़ियों को देखने में दिक्कत होगी। इसके अलावा आउटफील्ड में भी 8 से 10 मिमी घास रखनी होगी। ऑस्ट्रेलियामें हुए पहले डे-नाइट टेस्ट में पिच पर 11 मिमी की घास रखी गई थी।
समंदर सिंह ने कहा कि गुलाबी गेंद के कारण मैच में तेज गेंदबाज का बड़ा रोल होगा। अमूमन स्पिन गेंदबाज भारतीय पिचों पर अधिक सफल होते हैं लेकिन इस गेंद से स्पिन गेंदबाजों को अधिक मदद नहीं मिलेगी। कोलकाता में होने वाले मैच में ओस पड़ेगी। ऐसे में दिन के अंतिम सेशन में गेंद स्किट करेगी। स्पिनर्स को गेंद पकड़ने में भी मुश्किल होगी। ऐसे में जैसे-जैसे मैच बढ़ेगा। दिन के पहले सेशन में स्पिनर्स अधिक गेंदबाजी करेंगे। डे-नाइट टेस्ट सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ही नहीं फैंस के लिए भी रोमांचकारी होगा।
-जैसा उन्होंने विशाल भदौरिया को बताया
गुलाबी गेंद को लेकर दोनों टीमों का नजरिया
हमारे रिस्ट स्पिनर को बाउंस मिलेगा, इसलिए वे सफल रहेंगे: हरभजन
भारत के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा कि रिस्ट स्पिनर्स का गेंदबाजी एक्शन डे-नाइट टेस्ट में पहचानना मुश्किल होता है। लेकिन टीम में किस खिलाड़ी को मौका दिया जाए। यह मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा। टीम के पास कुलदीप यादव जैसा रिस्ट स्पिनर है। दिलीप ट्रॉफी के डे-नाइट मुकाबलों के दौरान रिस्ट स्पिनर्स काफी सफल रहे। कुलदीप ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था। लेग स्पिनर्स को भी अधिक स्पिन और बाउंस मिलेगा। फिंगर स्पिनर्स को बॉलिंग करने में दिक्कत होगी। गुलाबी एसजी बॉल का टेस्ट में पहली बार इस्तेमाल किया जाएगा
गेंदबाज गीली गेंद से प्रैक्टिस कर रहे, बल्लेबाजी आसान नहीं: मेहदी
बांग्लादेश के स्पिनर मेहदी हसन ने कहा कि कोलकाता में ओसपड़ेगी। ऐसे में गेंद पकड़ना आसान नहीं होगा। हमारे खिलाड़ी इसलिए गीली गेंद के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं। स्पिनर्स को भी बाउंस मिलेगा। हमने गुलाबी गेंद से अधिक मैच नहीं खेला है। ऐसे में यह हमारे लिए नया अनुभव होगा। तेज गेंदबाजों को इससे अधिक मदद मिलती है। ऐसेमें बल्लेबाजी करना आसान नहीं होगा। बड़ा स्कोर बनाने के लिए सभी को संभलकर और धैर्य के साथ खेलना होगा।
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