नई दिल्ली. सरकार के मुताबिक आयकर छापों में जब्त रकम में 2000 के नोटों की हिस्सेदारी घट रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 में आयकर के छापों में मिली रकम में 67.9% मुद्रा 2000 के नोटों के रूप में थी। बीते वित्त वर्ष (2018-19) में यह आंकड़ा 65.9% और चालू वित्त वर्ष (2019-20) में अब तक 43.2% रहा है।
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कालाधन छिपाने में बड़े नोटों काज्यादातर इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इसमें कमी की वजह ये हो सकती है कि सरकार और आरबीआई सिस्टम में 2000 के नोटों की सप्लाई शायद कम कर दे। पिछली कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बात की आशंका भी है कि 2000 के नोटों को बंद किया जा सकता है। नोटबंदी के 3 साल पूरे होने पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि 2000 के नोटों की जमाखोरी हो रही है, इन्हें बंद कर देना चाहिए।
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कालेधन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था। उस वक्त 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए। इसके बदले 500 का नया नोट जारी किया था। सरकार ने 1000 का नोट पूरी तरह हटा लिया और पहली बार 2000 का नोट जारी किया था।
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सिस्टम में अब 2000 के नोटों की सप्लाई घट रही है। मार्च 2017 में मौजूद नकदी में इन नोटों की संख्या 50% थी, ये अब घटकर 31% रह गई। सर्कुलेशन में मौजूद कुल नोटों में भी कमी आई है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2018 में 6.7 लाख करोड़ की वैल्यू के नोट सिस्टम में थे, इस साल मार्च में ये आंकड़ा घटकर 6.6 लाख करोड़ रुपए रह गया।
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